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अमर शहीदों के स्मरण से वर्तमान पीढ़ी में प्रेरणा एवं देशभक्ति का संचार होता है – डॉ कामिनी कुमार

देश के युवाओं के अंदर औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त कर देशभक्ति की भावना भरें – महेन्द्र कुमार

राँची. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (एबीआरएसएम ) की झारखंड इकाईकी प्रांतीय कार्यशाला प्रदेश अध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि राँची विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ कामिनी कुमार और विशिष्ट अतिथि आर एस एस के सम्पर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू एवं मुख्य वक्ता ए बी आर एस एम के उच्च शिक्षा प्रभारी महेंद्र कुमार ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित एवं माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। डॉ मीरा कुमारी ने सांघिक गीत एवं डॉ शशिशेखर दास ने सरस्वती वंदना किया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए कुलपति डॉ कामिनी कुमार ने कहा कि देश के अमर शहीदों को स्मरण करने से वर्तमान पीढ़ी में प्रेरणा एवं देशभक्ति का भाव विकसित होता है। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव 15 अगस्त 2023 तक आयोजित किया जाएगा जिसके अंतर्गत देश के 750 ऐतिहासिक स्थलों में कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहें हैं इनमें झारखण्ड के तीन स्थलों यथा उलिहातू (खूंटी) , मलूटी (दुमका ) एवं राजमहल (साहेबगंज ) शामिल है।उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव वर्ष में गांव – गांव जाकर उन अनछुए स्वतंत्रता के सेनानियों को ढूंढना होगा जिन्हें वर्तमान पीढ़ी नहीं जानती है एवं उनका जिक्र इतिहास में नहीं किया गया है जिन्हें सामने लाने का अनूठा कार्यक्रम आयोजित करना है। उन्होंने कहा कि झारखंड के 200 गांवों को आदर्श गांव भी घोषित किया जाना है।
मुख्य वक्ता महेंद्र कुमार ने कहा कि देश के युवाओं के अंदर औपनिवेशिक मानसिकता मानसिकता को समाप्त कर देशभक्ति की भावना भरने की जरूरत है।उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव के माध्यम से पूरे देश के अंदर व्यापक जनसंपर्क कर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि देना एवं उनके जीवनी को सभी के समक्ष प्रकट करते हुए करोड़ो देशवासियों को इस अभियान के बारे में अवगत करना है।उन्होंने कहा कि झारखण्ड के 75 महाविद्यालयों में व्याख्यान माला एवं कम से 05 विश्वविद्यालयों में दो दिवसीय संगोष्ठी आयोजित किया जाएगा जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों के परिजनों को सम्मानित भी किया जाएगा।
विशिष्ट अतिथि राजीव कमल बिट्टू ने अपने उध्बोधन में कहा कि स्वतंत्रता के स्थायित्व हेतु संस्कृति एवं संस्कार का संरक्षण करना जरूरी है।उन्होंने मैकाले शिक्षा पद्धति के दोषों व परिणामों की ओर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि देशभक्ति की भावना में ह्रास इसी कारण हुआ है।उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को हमेशा स्मरण करने से हमारे अंदर देशभक्ति जीवित रहेगा।
कार्यशाला का सफल संचालन प्रान्त महिला संवर्ग प्रमुख डॉ सुनीता गुप्ता ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति प्रकाश ने किया।
कार्यशाला को एच आर डी सी निदेशक डॉ सुदेश कुमार साहू, डॉ प्रीतम कुमार,डॉ ब्रजेश कुमार, डॉ राजकुमार चौबे, डॉ अभयकृष्ण सिंह, डॉ स्मृति सिंह, डॉ जयप्रकाश रविदास, डॉ विजय कुमार सिंह,डॉ विजय प्रकाश, डॉ मृत्युंजय प्रसाद, डॉ पूनम सहाय, डॉ कुमुद कला मेहता, डॉ भारती द्विवेदी, डॉ अनुराधा कुमारी, डॉ राज श्रीवास्तव, डॉ सुनीता कुमारी, डॉ बैद्यनाथ कुमार, डॉ राजकुमार सिंह, डॉ रामकेश पाण्डेय, डॉ करुणा पंजियारा ने भी संबोधित किया।
आज के कार्यशाला में राँची विश्वविद्यालय, विनोबा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग, डी एस पी एम यू, राँची, एस के एम यू, दुमका, कोल्हान विश्वविद्यालय, चाईबासा,एन पी यू, पलामू, सरला बिड़ला विश्वविद्यालय, राँची, जे आर यू, राँची आदि विश्वविद्यालयों से कुल 59 प्राध्यापक उपस्थित रहे।

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