खरगोन। शिष्य गुरु की शिक्षा पाकर नया जन्म पाता है, जीवकोपार्जन के योग्य बनता है, अपने अंदर के दुर्गुणों का नाश करता है, इसलिए गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश की संज्ञा दी गई है। यह विचार म.प्र. शिक्षक संघ जिला खरगोन द्वारा उबदी गायत्री शक्ति पीठ पर आयोजित “गुरू-वंदन” कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के तौर पर संघ के प्रदेश संयोजक हिरालाल तिरोले ने कही है। उन्होंने कहा भारत में शिक्षक ने देश,धर्म और संस्कृति के लिए सदैव कार्य किया है। हम केवल किसी स्कूल या कक्षा के शिक्षक बनकर अपने आपको सिमित नहीं करें। वरन सम्पूर्ण समाज का शिक्षक बनकर राष्ट्र और समाज को अपने ज्ञान और अनुभव लाभ दे। यही कार्य हमारे इतिहास में हमारे गुरु वशिष्ठ, विश्वामित्र, चाणक्य, रामकृष्ण और रामदास ने किया है। अध्यक्षता करते हुए सीएम राइज टेमला के प्राचार्य अशोक पंवार ने शिक्षकों से अपने गुरुत्व को बनाकर रखने का आव्हान किया। मुख्य अतिथि के रूप में संघ के प्रदेश अध्यक्ष लछीराम इंगले ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपने आचरण से बच्चों में संस्कार और संस्कृति के बीजारोपण किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर ग्रामीणों के साथ बड़ी संख्या में उपस्थित शिक्षकों के बीच सर्वप्रथम अतिथियों ने देवपूजन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। माधुरी पाटीदार,रीना पाटीदार और कविता गुर्जर ने सरस्वती वन्दना प्रस्तुत की। अतिथि परिचय कडवा पाटीदार ने कराया। नरेंद्र चौहान ने गीत गाया और संचालन जगदीश पाटीदार जनशिक्षक ने किया। आभार कमलेश पाटीदार अध्यक्ष ग्राम भारती ने माना।