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महात्मा ज्योतिबा फुले कॉलेज में गुरुवंदन समारोह का भव्य आयोजन

अमरावती। महात्मा ज्योतिबा फुले कॉलेज एवं अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (महाराष्ट्र) की प्रदेश महिला संवर्ग इकाई ने संयुक्त रूप से गुरुवंदन समारोह का आयोजन किया। इसका आयोजन महात्मा फुले कॉलेज के ऑडियो विजुअल ऑडिटोरियम में किया गया। कार्यक्रम के सत्कार मूर्ति और मुख्य वक्ता सौ. डॉ संगीता पकडे (यावले) (पूर्व सहसंचालक, संचालक, भारतीय प्रशासनिक पूर्व-सेवा प्रशिक्षण केंद्र) उपस्थित थीं जबकि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ महाराष्ट्र प्रदेश के अध्यक्ष प्रो. प्रदीप खेड़कर उपस्थित थे। इसके साथ अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ महिला संवर्ग की अध्यक्ष प्राचार्या डॉ. मीनलताई ठाकरे भोंडे भी उपस्थित थीं।

कार्यक्रम में गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद प्रो. डॉ. सोनाली आसरकर ने संगठन का प्रेरक गीत प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम की प्रस्तावना में प्रो. डॉ. रेखा मग्गिरवार ने बताया कि शैक्षणिक संघ द्वारा गुरुवंदन उत्सव क्यों आयोजित किया जाता है। तथा संगठन का स्थायी कार्यक्रम शैक्षणिक दृष्टि से किस प्रकार महत्वपूर्ण है। प्रो डॉ. स्वाति गिरासे प्रो. डॉ. सौ. संगीता पकले (यावले) द्वारा अपने शिक्षण एवं प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान किए गए अनेक कार्यों का उल्लेख किया गया। उसके बाद सौ. संगीता पकड़े (यावले) का शॉल एवं श्रीफल देकर सत्कार किया गया। डॉ. पकलेने अपने भाषण में कहा की शिष्य का जीवन कृतज्ञता और गुरु के मार्गदर्शन पर निर्भर करता है। यदि जीवन में सही गुरु मिल जाए तो जीवन एक उत्सव बन सकता है। आधुनिक शिक्षा प्रणाली के साथ-साथ वास्तविक जीवन में भी गुरु का स्वरूप और स्थिति बदल गई है। जीवन में गुरु के महत्व को समझना चाहिए। आज तांत्रिक युग में ज्ञान प्राप्ति के लिए गुरु के लिए कोई आयु सीमा नहीं है, जिसमें सामान्य ज्ञान, सहानुभूति, अच्छी सोच और सद्गुणों की आवश्यकता बताई गई है। उन्होंने यह भावना व्यक्त की कि शिक्षा का बाजारीकरण होने लगा है और शिक्षा प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है। इसके साथ उहोंने यह सलाह दी कि बच्चों को रटने के बजाए समझकर पढ़ाई करनी चाहिए। यदि छात्र जीवन में संघर्ष करते रहेंगे तो सफलता प्राप्त करना आसान हो जाएगा।

इसके उपरांत प्रो. प्रदीप खेड़कर ने उनके मार्गदर्शन में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा हरिद्वार में किए गए कार्यों की जानकारी दी। इसके साथ उन्होंने कहा कि गुरुवंदन कार्यक्रम एक स्थायी कार्यक्रम है, इस कार्यक्रम को हर विद्यालय में करवाना चाहिए। अपने भाषण में उन्होंने यह भी कहा कि अब अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ से जुड़े सभी संगठन एक ही नाम से काम करेंगे। पिछले 6 वर्षों से गुरुवंदन सोहाला कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और आधुनिक शिक्षा प्रणाली में गुरु के मार्गदर्शन और मार्गदर्शन के महत्व को नकारा नहीं जा सकता है। इसके अलावा नई शैक्षिक नीति में कई अच्छी बातें भविष्य में शिक्षा को एक नई दिशा देंगी। अपने अध्यक्षीय भाषण में प्राचार्या डॉ. मीनलताई ठाकरे ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में गुरु का महत्व है, गुरु का पवित्र स्थान है। इसके लिए, शिक्षक एवं विद्यार्थियों का यह रिश्ता कायम रखना चाहिए और सफलता हासिल करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि हम सबके सहयोग से हम शिक्षा क्षेत्र में बदलाव ला सकते हैं।

कार्यक्रम में प्राचार्य डाॅ. दीपक धोटे, प्राचार्य डॉ. नंदकुमार ठाकरे, प्राचार्य एच. आर देशमुख, प्राचार्य डाॅ. डी टी इंगोले, प्राचार्य डाॅ. स्मिता देशमुख, प्राचार्य डाॅ. अजय चर्जन, प्रो. थकसेन राजगुरे सहित अधिकांश पदाधिकारी एवं प्रोफेसर उपस्थित थे। इस कार्यक्रम की सफलता के लिए महात्मा फुले महाविद्यालय के स्टाफ का सहयोग प्राप्त हुआ।

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