दिल्ली अध्यापक परिषद की “विद्यार्थी हैं तो हम हैं” विषय पर आॅनलाइन परिचर्चा
अध्यापक परिषद की प्रतिबद्धता व समर्पण भाव से लक्ष्य पाना संभव
नई दिल्ली। दिल्ली अध्यापक परिषद ने 11 अप्रेल को “विद्यार्थी हैं तो हम हैं” विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया। परिचर्चा में शिक्षा निदेशक,दिल्ली उदित प्रकाश राय ने कहा कि जिस प्रतिबद्धता और समर्पण से अध्यापक परिषद के कार्यकर्ता कार्य करते हैं उससे शिक्षा के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्कूल सिर्फ एक बिल्डिंग नहीं है, स्कूल बच्चों से बनता है। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि वे बच्चों को सपना दिखाएं, उनमें ललक पैदा करें जिससे वे कुछ भी बन सकें पर उनके दिमाग में देश हित की भावना रहे। वे इंजीनियर बनकर भी सोचे कि उन्होंने अपने देश,समाज, गली—मुहल्ले के लिए क्या किया है? शिक्षा निदेशक ने अध्यापक परिषद के राष्ट्र प्रेम,छात्र हित व शिक्षा के क्षेत्र में समर्पण की भावना से प्रभावित होकर जयभगवान गोयल व जगदीश प्रसाद सिंघल सहित दिल्ली अध्यापक परिषद के अन्य प्रेरणादायी वीडियो क्लिप सभी शिक्षकों तक पहुंचाने को कहा। परिचर्चा की शुरुआत इंदु राठी द्वारा सरस्वती वंदना से हुई।
परिचर्चा में संगठन का परिचय देते हुए दिल्ली अध्यापक परिषद के संरक्षक जय भगवान गोयल ने कहा कि हमारे संगठन के मूल में राष्ट्र हित और छात्र हित है। उन्होंने कहा कि यदि विद्यार्थी नहीं हो तो विद्यालय, शिक्षक, शिक्षा विभाग आदि का कोई वजूद नहीं रहेगा। विद्यार्थी से ही हम सब हैं, यह संगठन है। उन्होंने परिषद द्वारा संचालित अनेक कार्यक्रमों की जानकारी दी और कहा कि हम शिक्षकों को विद्यार्थियों में राष्ट्रीय सोच विकसित करना चाहिए ,बच्चों में ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’की भावना विकसित करनी चाहिए जिससे वे समाज व देश के प्रति अपना कर्तव्य निभा सके।
जयभगवान गोयल ने इतिहास को सही रूप में बच्चों तक पहुंचाने का आग्रह शिक्षकों से किया और कहा कि हमारा देश हर प्रकार से समृद्ध था। अंग्रेजों के आने से पहले विश्व में हमारी GDP की हिस्सेदारी 66 प्रतिशत हुआ करती थी। भारत एक सनातन राष्ट्र है जिसकी खोज वास्कोडिगामा ने नहीं की । यह समृद्ध व संपन्न राष्ट्र पहले से ही मौजूद रहा है। उन्होंने कहा कि हमें बच्चों तक गीता का ज्ञान पहुंचाना होगा जिसमें कहा गया है कि सभी में एक समान आत्मा का वास है। अर्थात हम सभी समान है। गीता के ज्ञान से हम छूआछूत की समस्या का समाधान कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की व्यक्तिगत गुण अवगुण की पहचान करने तथा उनकी कमजोरियों को दूर करने का आह्वान किया।

राष्ट्र के उत्थान के लिए सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता
परम पूज्य डा भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष जगदीश प्रसाद सिंघल ने युगदृष्टा बाबा साहब अंबेडकर को सच्चे अर्थ में भारत का मसीहा बताया। बाबा साहब के संघर्ष पूर्ण जीवन से प्रेरणादायक अंशों को उद्धृत करते हुए उन्होंने बताया कि बाबा साहब कहा करते थे कि केवल राजनीतिक परिवर्तन से राष्ट्र का उत्थान नहीं हो सकता। राष्ट्र के उत्थान के लिए सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि बाबा साहब का दिया गया संदेश “शिक्षित बनो,संगठित रहो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने बाबा साहब के द्वारा नैतिक शिक्षा, प्राथमिक शिक्षा, उच्च शिक्षा, वाचनालय, छात्रावास, निः शुल्क शिक्षा आदि के क्षेत्र में योगदान को याद किया और बाबा साहब के संदेश “शिक्षा व कर्म को जोड़ो ” को बच्चों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
परिचर्चा का संचालन करते हुए राजेंद्र गोयल महामंत्री, दिल्ली अध्यापक परिषद ने सभी वक्ताओं का परिचय कराया तथा उन सभी का स्वागत किया। साथ ही भारतीय नववर्ष और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम के बारे में विस्तार से बताया।

धूमधाम से मनाएं भारतीय नववर्ष
परिचर्चा के तीसरे विषय अर्थात भारतीय नववर्ष, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के बारे में विचार रखते हुए दिल्ली अध्यापक परिषद के प्रदेश अध्यक्ष वेदप्रकाश ने कहा कि भारतीय काल गणना एक वैज्ञानिक गणना पद्धति है। यह किसी जाति, पंथ,क्षेत्र विशेष की गणना पद्धति पर आधारित नहीं बल्कि एक खगोलीय गणना है। इस गणना पद्दति से भयभीत अंग्रेजों ने अपना कैलेण्डर हम पर जबरस्ती थोपा और भारतीए संस्कृति को नष्ट करने का कुत्सित प्रयास किया। उन्होंने 13 अप्रैल को भारतीय नववर्ष को धूमधाम से मनाने और इससे बच्चों को अवगत कराने का आग्रह शिक्षकों से किया।
कार्यक्रम में धन्यवाद ज्ञापन परिषद की वरिष्ठ उपाध्यक्षा सरोज शर्मा ने किया। अवधेश पाराशर द्वारा कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।