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अधिकार बोध और व्यवहार का जन्म कर्तव्य बोध से होता है : प्रो.जगदीश प्रसाद सिंघल

जिस समाज में कर्तव्य बोध की स्वत: स्फूर्त भावना का सतत् प्रवाह रहता है, वह समाज सहज और स्वाभाविक रुप से अधिकार पूर्वक अपने उत्थान और नि:श्रेयस का पथ तय कर लेता है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ देश भर के शिक्षा संस्थानों में ऐसा शैक्षिक पर्यावरण सृजित करने के लिए प्रयत्न शील है, जिनमें कर्तव्य बोध भावना से प्रेरित राष्ट्र भक्त शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर सभ्य समाज और भव्य राष्ट्र निर्माण में अपने योगदान स्वयं ही सुनिश्चित कर सकें। ये विचार अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रोफेसर जगदीश प्रसाद सिंहल का है। उन्होंने राजकीय महाविद्यालय किशनगढ़ में एबीआरएसएम उच्चशिक्षा राजस्थान की स्थानीय इकाई के तत्वावधान में आयोजित कर्तव्य बोध दिवस के अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने आह्वान किया कि शैक्षिक महासंघ का यह स्पष्ट मत है कि शिक्षा की वास्तविक धुरी शिक्षक है। श्रेष्ठ शिक्षक ही सेवापरायण और कर्तव्य निष्ठ व्यक्तित्व गढ़ सकते हैं। इसलिए श्रेष्ठ शिक्षकों का परम कर्तव्य है कि वे अपने पूर्वजों के महान कर्तव्य पथ का अनुसरण करते हुए जाग्रत और समरस समाज संरचना के ध्येय को पूरा करना अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानें।

कार्यक्रम के प्रारम्भ में विषय प्रवर्तन करते हुए महासंघ के अतिरिक्त महामन्त्री डॉ नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि महासंघ के “राष्ट्र के लिए शिक्षा, शिक्षा के लिए शिक्षक और शिक्षक के लिए समाज” इस त्रिसूत्रीय शैक्षिक दर्शन का मन्तव्य ही यह है कि राष्ट्र की उन्नति का सर्वोच्च सशक्त साधन शिक्षा ही है। ऐसी शिक्षा जो विद्यार्थियों में सदैव राष्ट्र सेवा और समर्पण के भाव भर सके। इसलिए महासंघ ने अपने ज्ञान, विज्ञान और विवेक से विश्वभर में भारत की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले स्वामी विवेकानन्द और शौर्य, स्वाभिमान तथा सर्वोच्च त्याग के विश्वभर में वरेण्य नेताजी सुभाषचन्द्र बोस के जयन्तियों के प्रकाश में पूरे देश में कर्तव्य बोध पखवाड़ा आयोजन की परम्परा प्रारम्भ की जिसके बहुत सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि महासंघ पूर्ण आशान्वित है कि, ऐसे आयोजनों की अपने राष्ट्र की तेजस्विता पुन:विश्वभर में स्थापित होने में महती भूमिका होगी। भारत विश्वभर में अतीत के गौरव को पुन: प्राप्त कर सकेगा।

अध्यक्षीय वक्तव्य में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ सत्यदेव सिंह ने अपने–अपने हिस्से का कर्तव्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ संकाय सदस्य डॉ कमल मिश्रा, डॉ मुकेश कुमार, डॉ जे. पी.शुक्ला, डॉ सी. पी. पोकरणा, डॉओमप्रकाश पारीक सहित बड़ी संख्या में शिक्षकों और विद्यार्थियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का संचालन और आभार डॉ अनुराग शर्मा ने किया।

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