दिल्ली अध्यापक परिषद का दो दिवसीय (17 और 18 मई 2023 का) अभ्यास वर्ग एनआरआई रिजॉर्ट्स कोटाबाग (नैनीताल) में सफलता पूर्वक संपन्न हो गया।अभ्यास वर्ग दस सत्र में संपन्न हुआ।प्रथम दिवस का सत्रारंभ वीणा वादिनी मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुआ।दीप प्रज्वलन में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूरजी ,दिल्ली प्रांत के सह प्रांत प्रचारक विशालजी ,अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उत्तरी क्षेत्र प्रमुख जगदीश कौशिक, दिल्ली अध्यापक परिषद के अध्यक्ष वेद प्रकाश, महामंत्री राजेश पालीवाल एवं कोषाध्यक्ष नरेश शर्मा शामिल हुए। बहन इंदु राठी ने सरस्वती वंदना से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रथम सत्र की अध्यक्षता वेद प्रकाश और संचालन राजेश पालीवाल ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन मंत्री महेंद्र कपूर ने संगठन की स्थापना का महत्व एवं अभ्यास वर्ग की आवश्यकता पर बोलते हुए कहा की राष्ट्र हित में शिक्षा,शिक्षा हित में समाज और शिक्षक हित में समाज के ध्येय वाक्य को लेकर संगठन कार्य कर रहा है।संगठन के प्रत्येक सदस्य अपने विद्यालय को तीर्थ मानकर कार्य करें और विद्यालय को देवालय और बच्चे को मूर्ति मानें।कार्यकर्ता अभाव का प्रभाव हटाकर विद्यालय में अच्छे अध्यापक बनकर काम करें।इस संगठन के कार्यकर्ता धारा के विपरीत चलने वाले हैं, इसीलिए लोग हमें पगला भी कहते हैं। आज 12 लाख से अधिक शिक्षक एक संगठन की छतरी के नीचे काम कर रहे है। हमारा लक्ष्य देश के एक करोड़ चालीस लाख अध्यापकों के बीच पहुंचना है। आने वाले समय में राष्ट्रीय स्तर पर महाअभियान शुरू होने वाला है, जिसमें प्रत्येक कार्यकर्ता अपनी भूमिका का निर्वहन करेंगे। हमलोग कर्तव्य बोध दिवस, गुरुवंदन कार्यक्रम, वर्ष प्रतिपदा जैसे कार्यक्रम करते हैं साथ ही जन -जागरण का भी काम करना होगा।
अभ्यास वर्ग की आवश्यकता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि सामूहिक जीवन जीने, साथ चलने और गुस्से पर काबू करके सहनशीलता का विकास करना ही अभ्यास वर्ग की सार्थकता का मानदंड है।
द्वितीय सत्र के वक्ता दिल्ली प्रांत के सह प्रांत प्रचारक विशालजी ने राष्ट्र पुनर्निर्माण में शिक्षक की भूमिका विषय पर बोलते हुए चाणक्य का उल्लेख करते हुए कहा कि किस प्रकार मगध नरेश घनानंद की अकर्मण्यता को समझकर और भविष्य में आक्रांताओं से देश की रक्षा की योजना प्रारंभ किया और चंद्रगुप्त का पोषण कर अक्रांता से देश की रक्षा में अपनी भूमिका का निर्वहन किया।आज देश का भविष्य शिक्षकों के हाथों में है,जो देश का पुनर्निर्माण कर सकते है। उन्होंने लालकिले के प्रचार से प्रधान मंत्री द्वारा दिए गए भाषण के अंश को उद्धृत करते हुए पांच प्रण 1.विकसित भारत का निर्माण 2.गुलामी की हर चीज से मुक्ति 3.विरासत के उपर गर्व करना 4.एकता और एकजुटता 5.नागरिकों के कर्तव्य और शिष्टाचार को दोहराया।
तृतीय सत्र श्रेणी सह बैठक हुई।जिसमें अध्यक्ष/उपाध्यक्ष,मंत्री/संयुक्त मंत्री,संगठन मंत्री,कोषाध्यक्ष और प्रचार मंत्री के दायित्व और कर्तव्य को लेकर चर्चा हुई।
चतुर्थ सत्र महिला कार्य विस्तार का रहा, जिसमें वक्ता महिला उपाध्यक्ष बहन सरोज रही। उनका सहयोग बहन इंदु राठी और सीमा त्यागी ने दिया।
पंचम सत्र निकाय सह रहा, जिसमें राजकीय निकाय, नई दिल्ली नगरपालिका निकाय, निगम निकाय तथा सहायता प्राप्त निकाय की अलग अलग बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर निकाय की समस्याएं और समाधान की दिशा में विस्तृत चर्चा हुई।छठा सत्र संगठन का वैचारिक अधिष्ठान रहा। जिसके मुख्य वक्ता उत्तर क्षेत्र प्रमुख जगदीश कौशिक रहेऔरसदस्यता, प्रवास एवं मेरा विद्यालय मेरा तीर्थ विषय पर सातवां सत्र रहा। इस में विषय के वक्ता महामंत्री राजेश पालीवाल रहे।
अध्यक्ष वेद प्रकाश ने आठवें सत्र के विषय कार्यकर्ता एवं कार्यपद्धति पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ता में क्या-क्या गुण होने चाहिए, उसकी चर्चा करते हुए कार्यपद्धति पर भी अपने विचार व्यक्त किए। नौवां सत्र कार्य विस्तार एवं वार्षिक कार्य योजना का रहा। इस सत्र के वक्ता प्रचार मंत्री अजय कुमार सिंह और अतिरिक्त महामंत्री अवधेश कुमार पराशर रहे। अजय कुमार सिंह ने कार्य विस्तार पर प्रकाश डाला तो अवधेश पराशर ने वार्षिक कार्ययोजना पर। अंतिम और समापन सत्र (दसवां)में बोलते हुए महेंद्र कपूर ने कार्यकर्ताओं को अनुशासन में रहते हुए कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखने की नसीहत देते हुए संगठन के विस्तार हेतु प्रवास की आवश्यकता पर बल दिया। दिल्ली अध्यापक परिषद के अभ्यास वर्ग में 150 कार्यकर्ता शिरकत करके उत्साह और ऊर्जा से भरपूर होकर वापस दिल्ली लौट आए।
