सामाजिक सरंचना के संदर्भ में व्यक्ति या मनुष्य को उस संरचना की एक इकाई माना जाता है जिसका उस सामाजिक सरंचना में एक निर्धारित स्थान और उसके अनुरूप उसकी एक निर्धारित भूमिका होती है।