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अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखंड की प्रांतीय योजना बैठक संपन्न

देहरादून में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तराखंड की प्रांतीय बैठक राष्ट्रीय सह सचिव डॉo रश्मि त्यागी रावत की अध्यक्षता में संपन्न हुई। योजना बैठक में संघ की आगामी कार्यक्रमों के बारे में विस्तार पूर्वक चर्चा हुई तथा कार्य योजना तैयार की गई। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के केंद्रीय पदाधिकारी (उच्च शिक्षा संवर्ग ) महेंद्र कुमार ने अपने अभिभाषण में कहा कि ‘औपचारिक शिक्षा पैसा कमाना सिखाती है जबकि अनौपचारिक शिक्षा जीवन जीना सिखाती है ‘ महेंद्र कुमार  द्वारा स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत किए गए भारत माता पूजन कार्यक्रमों तथा ‘इंडिया से भारत की ओर’ , विषय पर आयोजित किये जाने वाली व्याख्यानमालाओं की समीक्षा की गई। एक अगस्त 2022 को सम्पूर्ण भारतवर्ष में करीब एक लाख विद्यालयों में भारत माता के पूजन का लक्ष्य लेकर चलने के बाद महासंघ ने सवा दो लाख के करीब प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में यह कार्यक्रम किया| देश में इतने वृहद स्तर पर किये जाने वाले जन जागरण के कार्यक्रमों में यह एक अग्रणी कार्यक्रम रहा | केवल उत्तराखंड में ही 1950 विद्यालयों में यह कार्यक्रम किया गया | उच्च शिक्षा के क्षेत्र में महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में व्याख्यानमालाओं का क्रम अब भी जारी है जो की 25 सितम्बर तक चलेगा | महेंद्रजी ने कहा कार्यक्रम कर्ता न बनकर कार्यकर्ता के नाते ऐसे आयोजनों को किया जाये ताकि ज्ञान की परंपरा को पुनर्स्थापित क़र भारत विश्वगुरु बने ऐसा दृढ संकल्प सभी का हो | इसके साथ साथ कार्यकर्ता स्वयं का उत्तरोत्तर गुणात्मक विकास करे, जिससे नए लोगो में ऊर्जा का संचार कर सके और मांगने से पूर्व कर्त्तव्य को स्थापित करे | ऐसी संकल्प शक्ति से महासंघ का कार्यकर्ता कार्य करे | महेंद्रजी ने कहा की शिक्षक को उसके व्यक्तिगत जीवन में भी नैतिक मूल्यों को सदैव प्रसारित करते रहना चाहिए क्योंकि तनाव में रहते हुए दी गयी शिक्षा कभी उत्कर्ष का साधन नहीं बन सकती | उन्होंने कहा की नयी शिक्षा नीति में नैतिक मूल्यों, भारत की श्रेष्ठ परम्पराये, जीवन मूल्य आदि विषयो को समाहित किया गया है| कक्षा 6 से 8 तक के बालक की शिक्षा में शिक्षक का ज्यादा ध्यान बालक को पढ़ाने से अधिक उसे पढ़ने में होना चाहिए ताकि उसके भविष्य को उसके कौशल के अनुरूप गढ़ने में मदद मिल सके | नयी शिक्षा नीति का केंद्र गुरु- शिष्य परंपरा की पुनर्स्थापना ही है | शंकराचार्य का वेदांत भास्कराचार्य का खगोल विज्ञान, मनु की विधि ऐसे महान ग्रन्थ को शैक्षिक परंपरा के माध्यम से स्थापित कर भारत पुनः विश्वपटल पर वही श्रेष्ठता स्थापित कर सके, जिससे मोहित होकर अनेको आक्रांता भारत आये और फिर यही के होकर रह गए |
इस अवसर पर उत्तराखंड की नवीन प्रांतीय एवं जनपदीय कार्यकारिणी का गठन भी किया गया, जिसमें प्रांत अध्यक्ष का दायित्व प्रो. प्रमोद मल, प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉo अलका सूरी, प्रांतीय महामंत्री, डॉ0 अनिल नौटियाल, अतिरिक्त मंत्री डॉo पारुल दीक्षित व राज कुमुद पाठक, उपाध्यक्ष (उच्च शिक्षा संवर्ग ) डॉo एन0ड़ी0 कांडपाल, उपाध्यक्ष (माध्यमिक शिक्षा संवर्ग ) कुलवंत सिंह बल, मंत्री (उच्च शिक्षा संवर्ग) डॉ0 पुशपेंद्र शर्मा, मंत्री (माध्यमिक शिक्षा संवर्ग) कृष्ण चंद्र बेलवाल, मंत्री (महिला संवर्ग) डॉ0 आरती रावत, मण्डलीय अध्यक्ष (गढ़वाल) नरेंद्र तोमर, मण्डलीय अध्यक्ष (कुमायू) रमेश धपोला, तथा प्रांतीय मीडिया प्रभारी का दायित्व संजय सैनी को मिला। इसी क्रम में उत्तराखंड के चार जिलों के जिला अध्यक्षों का दायित्व उत्तरकाशी से मनोज नेगी, टिहरी गढ़वाल से मीनाक्षी उनियाल, हरिद्वार से जगपाल सिंह, देहरादून से नीरज सैनी को मिला।
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