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स्वामी विवेकानंद की तरह शिक्षक अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनायें -मोहन पुरोहित 

भोपाल-15 जनवरी, मध्य प्रदेश शिक्षक संघ द्वारा आभासी पटल पर आयोजित कर्तव्य बोध दिवस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मोहन पुरोहित ने कहा कि एक शिक्षक वेतन का शिक्षक होता है, एक विषय का शिक्षक होता है, एक छात्रों का शिक्षक होता है और एक शिक्षक राष्ट्र का शिक्षक होता है जो समाज के विकास, बालकों के सर्वांगीण विकास का चिंतन करता है। जिसके रोम रोम में राष्ट्रीयता के भाव का संचार होता है। हमें वेतन का शिक्षक नहीं बनना है, हमें राष्ट्र का शिक्षक बनना है। यदि हम शिक्षकों के प्रकारों का चिंतन करते हैं तो विवेकानंद को देखो वो अंतर्राष्ट्रीय शिक्षक थे। बिना वेतन लिए उन्होंने संसार के कल्याण के लिए काम किया। विवेकानंद के विचारों ने संपूर्ण विश्व में एक नई क्रांति का सूत्रपात किया था। भारत माता को परम वैभव तक पहुंचाना हर शिक्षक का उद्देश्य होना चाहिए। हमें संगठन के विचार को हर छात्र तक हर विद्यालय तक पहुंचाना है। हमें संगठन में संख्यात्मक और गुणात्मक वृद्धि करनी है। हमारे आदर्श कार्यकर्ता कार्य व्यवहार में दक्ष हों, गुणात्मक, प्रभावात्मक व समयदानी हों, ऐसा विचार करना है। हमें मन का विकास करना है पर अहंकार नहीं करना, यह पतन की ओर ले जाता है। देश में संस्कारों में कमी आ रही है, मातृशक्ति के सम्मान में कमी आ रही है। इसे दूर करने हेतु हमें संकल्पित होना होगा। हमें “मेरा विद्यालय मेरा तीर्थ” का भी संकल्प लेना है। हमारे विद्यालय में छोटा सा सरस्वती का मंदिर हो, उद्यान हो ऐसा भाव रखें। हम अपने विचारों को दृढ़ इच्छाशक्ति से मजबूत बनाएं। हमें कोरोना के साथ जीने की आदत डालनी होगी। कोरोना काल में हम समाज के कमजोर वर्ग का ध्यान रखें। कोई गरीब भूखा ना सोए। हम भावी पीढ़ी के निर्माता हैं। हमारे छात्र भी सुभाष भगत जैसे हों। हमारी सोच सकारात्मक होनी चाहिए।हम परमार्थ भाव का चिंतन करते रहें। हमें, ज्ञान, अभिव्यक्ति कौशल, बोलने का विकास बढ़ाने की आवश्यकता है। हमारा दिन ऐसा बीते कि हम रात को चैन की नींद सो सकें और रात ऐसी बीते  कि सुबह दुनिया को मुँह दिखाने में शर्म ना आए। हमें अपना जीवन चंदन के वृक्ष की तरह बनाना होगा जिसमें लिपटे सांप से तथा उस पर वार करने वाली कुल्हाड़ी से भी चंदन की महक आती है। आप मां भारती को परम वैभव पर पहुंचाने में अपना योगदान दें।
 मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष लक्षीराम इंगले की अध्यक्षता, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्यक्षेत्र के बौद्धिक प्रमुख विलास बालकृष्ण गोले के मुख्य आतिथ्य एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, राष्ट्रीय अतिरिक्त महामंत्री संजय राऊत, मध्य क्षेत्र प्रमुख विजयसिंह, प्रदेश संगठन मंत्री किशनलाल नाकड़ा, सह संगठन मंत्री देवकृष्ण व्यास एवं बृजमोहन आचार्य की उपस्थिति में ऑनलाइन संपन्न हुआ । इस कार्यक्रम में प्रदेशभर के लगभग 400 शिक्षकों, प्रांतीय, संभागीय, जिला, विकासखंड, नगर व तहसील शाखाओं के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विलासराव  गोले ने कहा कि यूनियन के रूप में हम शिक्षक हित की बात करते हैं पर एक शिक्षक के रूप में अपने विद्यालय के प्रति हमें प्रेम होना चाहिए। हमें नियमितता, समय पालन, शाला स्वच्छता और शाला में उद्यान विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए। नई शिक्षा नीति को लागू करने का माध्यम उपकरण हम शिक्षक हैं। इस नीति को मनोवैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों आदि ने कई प्रयोग करने के बाद बनाया है। देश के लिए क्रांतिकारी, शिक्षाविद, अधिकारी, सैनिक आदि गढ़ने में शिक्षकों का योगदान रहा है। हमारा सौभाग्य है कि हमें इनके शिक्षक बनने का अवसर मिला है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष लछीराम इंगले ने कहा कि मध्यप्रदेश में शिक्षक संघ के अलावा ऐसा कोई अन्य संगठन नहीं है, जो कर्तव्यबोध दिवसों का आयोजन करता हो। आजादी के अमृत महोत्सव बर्ष में स्वतंत्रता के लिए त्याग समर्पण करनेवाले शहीदों को लेकर शिक्षक संघ द्वारा वर्ष भर जनजागरण का अभियान चलाया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ  संगीता बेंडे द्वारा सरस्वती वंदना से हुआ। कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के प्रांतीय महामंत्री छत्रवीरसिंह राठौर एवं आभार प्रदर्शन प्रांतीय उपाध्यक्ष अखिलेश मेहता के द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अंत में मध्य प्रदेश शिक्षक संघ के पूर्व महामंत्री तथा छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के संस्थापक अध्यक्ष व छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षा आयोग के पूर्व अध्यक्ष  चंद्रभूषण शर्मा तथा छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक संघ के संस्थापक कुँवर सिंह पवार के निधन पर उन्हें एक मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई।
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