Welcome To ABRSM NEWS

 

देश की पहली शिक्षा नीति है जो भारतीयता  के बोध तथा भारतीय संस्कृति पर बल देती है-डॉ.नारायण लाल  गुप्ता

जयपुर,राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) एवं शैक्षिक मंथन संस्थान, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में राजकीय शाकम्भर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, सांभर लेक (जयपुर) इकाई द्वारा “राष्ट्रीय शिक्षा नीति में उच्च शिक्षा: मुद्दे और चुनौतियां” विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया । कार्यक्रम का विधिवत् शुभारम्भ डॉ. ओमप्रकाश  पारीक ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति के साथ  एवं रुक्टा (राष्ट्रीय) के प्रदेश अध्यक्ष  डॉ. दीपक कुमार शर्मा द्वारा अतिथियों  का स्वागत परिचय देकर किया।
 कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अतिरिक्त महामंत्री डॉ.नारायण लाल  गुप्ता ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आधुनिक भारतीय शिक्षा के इतिहास में मैकाले की शिक्षा नीति के बाद सबसे बड़ा नीतिगत परिवर्तन है । यह पहली शिक्षा नीति है, जो भारतीयता  के बोध तथा भारतीय संस्कृति पर बल देती है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति समाज के सभी वर्गों से परामर्श के पश्चात् तैयार की गयी है। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी 21 वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो ।  शिक्षा से सम्बन्धित मूलभूत प्रश्नों एवं समस्याओं, जैसे- शिक्षा के उद्देश्य, शिक्षा और भारतीयता आदि को उठाते हुए उन्होंने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं के समाधान का प्रयास करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनेक पक्ष व प्रावधानों, जैसे – शोध, शिक्षण संस्थान, भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए प्रावधानों आदि पक्षों पर भी उन्होंने प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति की सफलता उसके सफल क्रियान्वन पर निर्भर करती है । इसके साथ ही उन्होंने प्रतिभागियों  के द्वारा जिज्ञासावश पूछे गए प्रश्नों का समाधान भी किया ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कॉलेज शिक्षा, राजस्थान के पूर्व संयुक्त निदेशक एवं शैक्षिक मंथन, जयपुर के प्रधान संपादक डॉ. राजेंद्र शर्मा ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज की आवश्यकता को देखते हुए शिक्षा व्यवस्था नैतिकता से जुड़ी होनी चाहिए। शिक्षा विद्यार्थियों को संस्कार दें और नैतिकता को प्रोत्साहित करें,  क्योंकि आज आवश्यकता है नैतिक उत्थान की और नई पीढ़ी को हमारे सांस्कृतिक ज्ञान के अथाह भंडार से परिचित कराने की ।
इससे पूर्व कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए  रुबेन सरन माथुर द्वारा कहा गया कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो जो संस्कृति और सांस्कृतिक मूल्यों से जुडी हुई हो, रोज़गार की आवश्यकताओं के अनुरूप तथा भारतीय भाषाओं में हो, विद्यार्थियों में भारतीयता का बोध विकसित हो और शिक्षा व्यवस्था की मूल्याङ्कन प्रणाली ऐसी हो, जो मात्र उपलब्ध ज्ञान को ही रटने पर बल न दे बल्कि नवाचार और नवीन सृजन को प्रोत्साहित करें तथा वास्तविक प्रतिभा को पहचानें ।
कार्यक्रम का संचालन वेबिनार के आयोजन सचिव डॉ. सुरेश कुमार शर्मा ने किया एवं डॉ ओम प्रकाश शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया । कार्यक्रम में सम्पूर्ण देश के 1200 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया । वेबिनार का तकनीकी संचालन डॉ. रोहित बेरवाल ने किया । अंत में कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।
Written by
No comments

LEAVE A COMMENT