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राज शिक्षक संघ राष्ट्रीय का प्रदेश अधिवेशन संपन्न

भीलवाड़ा। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय का प्रदेश अधिवेशन 7 मई 2023 को भीलवाड़ा में आयोजित हुआ। इस प्रांतीय अधिवेशन में सत्र 2023-24 के लिए प्रदेश कार्यकारिणी का निर्विरोध निर्वाचन हुआ। प्रथम सत्र में श्री प्रहलाद शर्मा (संगठन मंत्री) ने शिक्षक कार्यकर्ताओं को संगठन की कार्य प्रणाली और रीति नीति से अवगत करवाया।

द्वितीय वैचारिक सत्र श्री हनुमान सिंह ने अधिवेशन में उपस्थित शिक्षकों को पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षकों को कार्य के साथ–साथ राष्ट्र के वैचारिक ध्येय को ध्यान में रखते हुए समाज को खड़ा करना होगा। शिक्षक संघ राष्ट्रीय के नाम की सार्थकता के लिए कार्यकर्ता में राष्ट्रीय विचारधारा से ओत-प्रोत होना जरूरी है।

संगठन की सुदूर्ढ़ता के लिए कार्यकर्ता को संगठन के प्रति कटिबद्ध और प्रतिबद्ध होना चाहिए। विचार की प्रतिबद्धता ही संगठन की प्रतिबद्धता है। कार्यकर्ता को सबसे पहले राष्ट्र और समाज को आधार मानकर, उनके बारे में चर्चा करनी चाहिए। हम सभी कार्यकर्ताओं ने अपने अपने कार्य क्षेत्र में कार्य करते हुए छात्रों और अभिभावकों को राष्ट्रीय विचार प्रदान कर दिया तो हम आगामी दो वर्ष में परिवर्तन ला सकते हैं।

इसी सत्र में सहप्रातं प्रचारक श्री मुरलीधर ने शिक्षकों को भारत के नवनिर्माण की परिकल्पना को ध्यान में रखते हुए, समाज को जोड़ कर शिवाजी महाराज की राष्ट्रीय अवधारणा के साथ समाज निर्माण करने की प्रेरणा दी। इस सत्र के अंत में अधिवेशन सहसंयोजक श्री राम प्रसाद माणमिया ने सभी सहयोग करने वाले कार्यकर्ताओं का आभार प्रकट किया।

प्रदेश निर्वाचन अधिकारी श्री उमराव लाल वर्मा ने निर्विरोध नवनिर्वाचित प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा की। श्री महेन्द्र लखारा प्रदेश महामंत्री ने वर्ष भर का महामंत्री प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

समारोप सत्र के मुख्य वक्ता श्री जे.पी सिघल ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) जिसमें शिक्षक संघ राष्ट्रीय भी सम्मिलित हैं, उसके तीन सूत्र है – राष्ट्र हित में शिक्षा, शिक्षा हित में शिक्षक,और शिक्षक हित में समाज। जिनको ध्येय में रखकर हम सभी कार्य करते हैं। आप सभी के सहयोग और प्रयास से देशभर में अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के 12 लाख से अधिक सदस्य है, जिसमें सर्वाधिक सदस्यता राज.शिक्षक संघ राष्ट्रीय की है। जिस अनुपात में हमारी सदस्यता है, उसी अनुपात में समाज और राष्ट्र के कार्यो में भी हमारी भूमिका होनी चाहिए। जिस भावना, संकल्प के साथ संगठनकर्ताओं ने संगठन की स्थापना की थी, उन सभी को ध्येय में रखकर हमें कार्य करते रहना चाहिए। सरकार कोई भी हो, यदि संगठन बल मजबूत होगा तो सरकार को आपकी ताकत के आगे झूकना पड़ेगा। आप सभी शिक्षको को शिक्षक बनने का ईश्वर से नैतिक वरदान मिला है, हमें अपनी शिक्षक समस्याओं को हल करवाने के साथ साथ हमें हमारा नैतिक बल अधिक मजबूत करना पड़ेगा।

श्री सिंघल ने उपस्थित कार्यकर्ताओं से कहा कि वर्तमान काल में वैचारिक युद्ध चल रहा है। इस वैचारिक युद्ध में हमारे विचार को अधिक सामर्थ्यवान बनाने की जरूरत है। भारत की पहचान को व्यापक बनाने की जरूरत है। हिंदुस्तान की जो उच्च सभ्यता और संस्कृति रही है, उसे पुनः वैभव पर पहुंचाने व इस सार्थक कार्य को आगे बढ़ाने में शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका है।

इस दूनिया में जो भी श्रेष्ठ व्यक्ति हैं, उनकी निगाहें भारत की ओर लगीं हैं।

भारत विभिन्न संस्कृतियों वाला देश है। जिसको कुछ ताकतें विभिन्न हिस्सों में बांटने की ओर अग्रसर है। जिसको रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक की है। आप सभी को सचेत रहकर इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है।

इसके पश्चात, श्री नवीन कुमार शर्मा ने अपने उद्बोधन में निवर्तमान कार्य काल में दिये सहयोग, समर्थन के लिए आभार प्रकट किया। संगठन को अपनी मांगों को मनवाने हेतु संघर्ष की दिशा तय करने की जरूरत बताई।

संलग्न नवनिर्वाचित प्रदेश कार्यकारिणी में भीलवाड़ा जिले से श्री कैलाश सुथार प्रदेश उपाध्यक्ष अजमेर मंडल, श्रीमती सुषमा विश्नोई महिला उपाध्यक्ष एवं श्री जयकांत पत्रिया अध्यापक प्रतिनिधि पद पर निर्वाचित हुए हैं।

कार्यक्रम में अतिथि श्री हनुमान सिंह, क्षेत्रीय कार्यकारिणी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान, श्री मुरलीधर, सहप्रांत प्रचारक, एवं घनश्याम जी, संगठन मंत्री अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान का मार्ग दर्शन मिला।

 

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