उदयपुर, राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की ओर से फतह स्कूल उदयपुर में ‘इंडिया से भारत’ की ओर विषय पर व्याख्यान माला अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के राजस्थान प्रदेश संगठन मंत्री घनश्याम जी के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर घनश्याम जी ने कहा कि पाश्चात् संस्कृति ने हमेशा हमे दिग्भ्रमित किया है। ऐसे में हमे सदैव जागृत रहकर सद्साहित्य का ज्ञान अर्जित कर तदनुरूप समाज को सही राह व दिशा देने की जिम्मेदारी शिक्षको पर है। उन्होंने स्वतन्त्रता के अमृत महोत्सव की जानकारी देते हुए हमारे अतित व गौरवशाली भारत को जानने के लिए चिंतन का विषय देते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को इंग्लैंड का झण्डा हटा लेकिन क्या भारत आज भी सही मायने में स्वतंत्र हो पाया? स्वतंत्रता आन्दोलन में नारियों व वीर महापुरुषों के बलिदान को भुलाया नही जा सकता, किन्तु शहीदों की आत्माएं क्या हम पर गर्व कर सकती है? विदेशी राज गया लेकिन क्या आजादी के 75 वर्ष बाद भी वह पूर्णरूप से चला गया?क्या अपना राज आया ? उक्त यक्ष प्रश्न कर शिक्षको को चिंतन करने के विषय प्रदान किये।
रुक्टा के प्रदेश सह संगठन मंत्री बालुदान सिंह बारहठ ने कहा कि तत्कालीन सत्तालोलुपता के कारण आज भी भारत पूर्ण स्वतंत्र नही हुआ ।अंग्रेजों ने इस देश की शिक्षा व्यवस्था को खत्म कर हमे मानसिक दासता दी गई। हमे उसके बारे में सोचना आवश्यक है। भारत पूर्व से ही जगदगुरु था। अतः प्रत्येक शिक्षक को ‘इण्डिया से भारत’ बनाने में अहम भूमिका निभानी होगी।देश को फिर से जगतगुरु बनाना होगा। जिलाध्यक्ष भेरूलाल तेली ने बैठक को सम्बोधित करते हुये सदस्यता अभियान पर जोर दिया। जिलामंत्री चन्दन मल बागडी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुये सदस्यता अभियान, शिक्षक समस्याओं, दो दिवसीय शैक्षिक सम्मेलन की जानकारी दी ।
इस अवसर पर संगठन के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर लाल वया, उपाध्यक्ष संस्कृत अभय सिंह राठौड़, जिला संगठन मंत्री चन्द्र शेखर परसाई, जिलाध्यक्ष भेरूलाल तेली, जिला मंत्री चन्दन मल बागड़ी, राजकमल लौहार, पूर्व जिला मंत्री बसन्ती लाल श्रीमाली सहित उपशाखाओं के अध्यक्ष, मंत्री,महिला मंत्री, कोषाध्यक्ष, जिला कार्यकारिणी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं विशेष आमन्त्रित सदस्यो सहित अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे ।
