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एबीआरएसएम ने कर्तव्यबोध दिवस पर किया संगोष्ठी का आयोजन

हजारीबाग। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की विनोबा भावे विश्वविद्यालय इकाई के देखरेख में कर्तव्यबोध दिवस पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। स्थानीय डीवीसी सभागार में आयोजित इस संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष डॉ बालेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि समाज के प्रति न्योछावर होना ही कर्तव्य बोध है। कर्तव्यबोध से ही मनुष्य में बौद्धिक विकास होता है। स्वामी विवेकानंद ने शिकागो सम्मेलन में अपने संबोधन से विश्व में पहचान बनाई, इसलिए वे आदर्श पुरुष माने जाते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आईएएस की सिविल सेवा की परीक्षा में सफलीभूत होकर भी देश के प्रति पद को त्याग कर देश सेवा से जुड़े। उनका यह देश प्रेम के प्रति आना कर्तव्य बोध है। कर्तव्य बोध मानव हित में होता है। उन्होंने आगे कहा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संगठन का और अधिक विस्तार करना होगा, तभी हम अपने कर्तव्यों से देश को विकसित कर पाएंगे।

इसके पश्चात, मार्खम कॉलेज के भूगोल के विभागाध्यक्ष डॉ प्रदीप कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि हमारा कर्तव्य बोध परिवार, समाज एवं राष्ट्र के प्रति होना चाहिए। वर्तमान में समरसता समाप्त होती जा रही है और कट्टरता फैल रही है, इसलिए युवाओं को कर्तव्यबोध के प्रति जागरूक रहना होगा, क्योंकि युवा शक्ति ही परिवर्तन ला सकते हैं।इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व भौतिकी विभागाध्यक्ष सह प्रो जटाधर दुबे ने कहा कि निद्रा, तंद्रा, भय, क्रोध,आलस्य कर्तव्यबोध के बाधक है। विशेष अतिथि के रूप में फिल्मकार गजानन पाठक ने कहा कि भारत की भारतीयता वसुधैव कुटुंबकम है। भारत में जन्म लिया हैं तो भारतीयता हमारा कर्तव्य होता है। उन्होंने कहा कि योग के साथ कर्म की भी महानता होती है।

वहीं, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पूर्व राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ विनोद रंजन ने कहा कि वर्तमान में हम रितियों से अलग हो रहे हैं, जिससे कर्तव्यबोध में गिरावट हुई है। विश्वविद्यालय के पीजी विभाग के प्राध्यापक डॉ मनोज कुमार ने कहा कि युवाओं का कर्तव्य भारतीय संस्कृति की रक्षा करना है ।

इसके बाद, अधिवक्ता संतोष पांडेय ने कहा कि कर्तव्य नहीं करने से बोध का ज्ञान नहीं होता। प्रदेश संगठन मंत्री सह संत कोलंबा कॉलेज के प्राध्यापक डॉ राजकुमार चौबे ने संगठन परिचय कराते हुए कहा कि, कर्तव्यबोध के लिए संगठन शिक्षा हित पर कार्य कर रही है। संगठन का उद्देश्य राष्ट्रहित में शिक्षा, शिक्षा हित में शिक्षक एवं शिक्षक हित में समाज है। हमें अपने अधिकार के साथ कर्तव्य बोध का ज्ञान होना जरूरी है। शिक्षक अनवरत शिक्षा के साथ राष्ट्र भावना से कार्य करने में अपनी अहम भूमिका निभाती है।

बता दें, संगोष्ठी की शुरुआत स्वामी विवेकानंद की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर हुई। छात्रों ने स्वागत गान प्रस्तुत किया। मंच संचालन संगठन के महामंत्री डॉ मृत्युंजय प्रसाद एवं धन्यवाद ज्ञापन विनोबा भावे विश्वविद्यालय के एमबीए विभाग के प्राध्यापक डॉ सरोज रंजन ने किया।

गौरतलब है कि, अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के कर्तव्यबोध दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में उपस्थित छात्रों ने संगोष्ठी समापन के पश्चात अपनी पहले कर्तव्यबोध का परिचय देते हुए स्वच्छता की मिसाल पेश की। इस दौरान सभी छात्रों ने संगोष्ठी स्थल डीवीसी सभागार समेत पूरे परिसर में स्वच्छता अभियान चलाकर कचरे एवं गंदगी का निराकरण किया।

 

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