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सामाजिक रूप से प्रासंगिक ज्ञान सृजन समाज को गतिशीलता प्रदान करता है-श्री गुंथा लक्ष्मण

आंध्र प्रदेश के केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय ने “भारत में शैक्षिक सुधार: शिक्षकों की भूमिका” विषय पर एक सत्र का आयोजन किया। इस मौके पर अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के संयुक्त संगठन सचिव मुख्य वक्ता रहे। शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए उन्होंने कहा कि, शैक्षिक सुधार लाने में शिक्षक की भूमिका सबसे अहम है। इसके साथ उन्होंने, एन.ई.पी-2020, 21वीं सदी की चुनौतियों, ज्ञान, सूचना और नवाचार की शक्ति को पहचानने की सलाह दी।

इस अवसर पर सीटीयूएपी के कुलपति प्रो. टी.वी. कट्टीमनी ने कहा कि बड़ी संख्या में छात्र डिग्री और अर्जित कौशल के हिसाब से उपयुक्त नौकरी की तलाश नहीं करते हैं। इसलिए, भारतीय परिदृश्य में शैक्षिक सुधार आवश्यक हैं।

बता दें, विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर कर्तव्य बोध दिवस भी मनाया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षकों और छात्रों ने भाग लिया।

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