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अमृत महोत्सव का लक्ष्य मंथन के उपरांत अमृत प्राप्त करना है-मनोज,जस्थान सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख

 बांसवाड़ा, रुक्टा (राष्ट्रीय) के बांसवाड़ा विभाग के तत्त्वावधान में स्वाधीनता के हीरक जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में समारोह  आयोजित हुआ। समारोह के मुख्य वक्ता राजस्थान सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज  रहे । विशिष्ट सान्निध्य क्षेत्र प्रचारक निंबाराम, विभाग प्रचारक विकास  और अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ के अतिरिक्त महामंत्री डॉ. नारायण लाल गुप्ता का मिला। कार्यक्रम में अतिथियों ने रुक्टा (राष्ट्रीय) द्वारा स्वराज के 75 वर्ष होने के उपलक्ष्य में प्रकाशित कैलेंडर एवं डायरी का विमोचन भी किया ।
मुख्य वक्ता राजस्थान सह क्षेत्र प्रचार प्रमुख मनोज ने कहा कि अमृत महोत्सव का लक्ष्य मंथन के उपरांत अमृत प्राप्त करना है। अमृत महोत्सव के रूप में मानसिक रूप से स्वतंत्र होने की आवश्यकता है। आज के नवांकुर 25 वर्ष बाद जब अमृत महोत्सव स्मरण करें तो उन्हें गौरवान्वित होना चाहिए। बाल पीढ़ी को महापुरुषों से परिचय करवाना जरूरी है। विशेषतः अज्ञात स्वतंत्र वीर जिन्हें पुस्तकों में स्थान नहीं मिला। उनके अवदान से परिचय करवाना है। भारत का स्वाधीनता संग्राम विश्व का सबसे बड़ा स्वाधीनता संग्राम रहा है। भवानी मंडी के पन्नालाल प्रजापत जैसे स्वातंत्र्य वीरों का परिचय ही नहीं है। तात्या टोपे जैसे वीरों ने देसी रियासतों की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम को विद्रोह नाम दे दिया गया। इतिहास को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत कर स्वाधीनता के लिए शहीद होने वाले और अपना सर्वस्व अर्पित करने वाले अनेक वीरों को भुला दिया गया। अजमेर के शंभु नायक को कौन जानता है ? उनके अवदान को छुपा दिया गया। यदि नई पीढ़ी को महापुरुषों के संघर्ष और साहस से परिचित नहीं कराया तो शायद आने वाली पीढ़ियां उनकी शहादत को भूल जाएंगी। हम विवाह या अन्य मांगलिक आयोजन तिथि के अनुसार आयोजित करते हैं जबकि उनकी वर्षगांठ मनाते हैं तो अंग्रेजी तारीख के अनुसार। हमें अवधारणाओं की वास्तविकता को परखना होगा और यदि अनुपयोगी हैं तो उन अवधारणाओं के स्थान पर नवीन अवधारणाएं स्थापित करनी होंगी। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण धारा 370 को हटाना है। युवा पीढ़ी को समझ कर कदम उठाएंगे तभी अमृत महोत्सव सार्थक होगा।
विषय प्रतिपादन करते हुए प्रदेश महामंत्री डॉ. सुशील कुमार बिस्सू ने कहा कि स्वतंत्रता में क्रांतिकारियों और प्रबुद्ध जनों ने अपना सर्वस्व अर्पण किया है। स्वशिक्षा, स्वराज और स्वावलंबन से प्रेरित शिक्षकों के कथ्यों को आधार बनाकर कैलेंडर (पंचांग) निर्मित किया गया है जो मार्गदर्शक की भूमिका में रहेगा।
अध्यक्षीय भूमिका में रुक्टा राष्ट्रीय के उपाध्यक्ष डॉ. गंगाश्याम गुर्जर ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. राजेश जोशी ने किया । सरस्वती वंदना विभाग सचिव डॉ. प्रमोद वैष्णव और वंदे मातरम् गायन डॉ. रिया उपाध्याय ने प्रस्तुत किया ।
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