हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय शैक्षिक संघ द्वारा “कर्त्तव्य बोध” दिवस का आयोजन किया गया। शैक्षिक संघ के वार्षिक आयोजनों में कर्तव्य बोध दिवस एक महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम है। इसका आयोजन दो महापुरुषों की जन्मदिवस के मध्य किया जाता है। भारतीय अध्यात्म, दर्शन एवं संस्कृति से विश्व को परिचित कराने वाले स्वामी विवेकानंद जी की जयंती जिसे हम ’युवा दिवस’ के रूप में मनाते हैं और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अदम्य साहस एवं राष्ट्र के प्रति अपना सर्वस्व न्यौछावर करने वाले सुभाष चन्द्र बोस की जयंती को हम ’पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाते हैं। ये दोनों ही महापुरुषों राष्ट्र के प्रति अपने सर्वोच्च कर्तव्य का निर्वहन करने के अप्रतिम उदाहरण हैं। इनका जीवन हमें अपने कर्तव्य के निर्वहन का संदेश देता है। इसी भावना से प्रेरित इस दिवस के उपलक्ष्य में हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय शैक्षिक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ह.के.विवि. के माननीय कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार, सारस्वत अतिथि प्रो. सुनीता श्रीवास्तव, प्रति कुलपति प्रो. सुषमा यादव, कुलसचिव प्रो. सुनील कुमार, इकाई अध्यक्ष प्रो. मनोज कुमार सिंह द्वारा भारत माता की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
मंचासीन मुख्य-अतिथि प्रो वीसी एवं कुलसचिव द्वारा कर्त्तव्य बोध पर ज्ञानवर्धक उद्बोधन दिया गया। विश्वविद्यालय के कुलगुरु ने अपने वक्तव्य में कि हमें अपने इतिहास, संस्कृति पर गर्व होना चाहिए और शिक्षकों का यह दायित्व बनता है कि, वे इतिहास के तथ्यों में सुधार करें। उन्होंने कहा कि, भारत के पास असीम क्षमता है जो उसे स्वावलंबी बना सकती है। अतिथि प्रो. सुनीता श्रीवास्तव ने शिक्षकों के कर्तव्यों की ओर सभी का ध्यान आकृष्ट किया। उन्होंने कहा कि, वे अपने आचरण से समाज में एवं विद्यार्थियों के समक्ष एक आदर्श प्रस्तुत करें। प्रति कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने अपने वक्तव्य में उपनिषदों के वाक्यों के संदर्भों के माध्यम से श्रवण, मनन व निधिध्यासन की प्रणाली को समझाया।
मंचासीन कुलपति, प्रति कुलपति, अतिथि एवं कुलसचिव द्वारा अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के वार्षिक कैलेंडर का विमोचन किया गया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राजीव कुमार सिंह द्वारा किया गया एवं राष्ट्र गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। कर्तव्य बोध दिवस कार्यक्रम में मंच संचालन डॉ. देवेंद्र सिंह राजपूत द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के 60 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।