कांसा,गुजरात।अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के आह्वान पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ गुजरात द्वारा 12 मार्च को पूर्णकालिन वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं के अभ्यास वर्ग का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम कांसा के उमिया माता मंदिर परिसर, विसनगर जिला महेसाणा गुजरात में किया गया। इस अभ्यास वर्ग में सरदार सिंह मछार (दाहोद), रूचा बेन व्यास (सूरत), विद्या बेन कुलकर्णी (हिम्मतनगर), दशरथ भाई रावल (पाटण), कन्हैया लालजी परमार (दांता), भीखा भाई पटेल (हिम्मत नगर) के साथ पूर्ण कालीन वानप्रस्थी कार्यकर्ताओं ने भाग भी लिया।
अभ्यास वर्ग के शुभारंभ सत्र में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के उपाध्यक्ष मोहनजी पुरोहित ने संगठन का परिचय दिया। साथ ही संगठन का ध्येय, लक्ष्य, पूर्णकालीनी भूमिका और कार्य पद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वयं के लक्ष्य की जानकारी देते हुए कहा कि, “मुझे संगठन के आह्वान पर सेवा निवृति के बाद, अपना समय संगठन के लिए समर्पित करना है। इससे मेरी भूमिका भी सार्थक होगी।”
द्वितीय सत्र मे राष्ट्रीय सचिव एवं प्रदेश अध्यक्ष भीखा भाई पटेल ने कार्यकर्ता के कार्य व्यवहार के बारे में जानकारी देते हुए कहा यह आवश्यक है कि, आदर्श कार्यकर्ता की तरह हमारे जीवन में यह गुण झलकें।
तृतीय सत्र में प्रांत संगठन मंत्री सरदार सिंह मछार ने कार्यकर्ता के प्रवास की जानकारी देते हुए कहा की,”कार्यकर्ता निर्माण और संगठन विस्तार के लिए कार्यकर्ता का प्रवास बहुत ही महत्वपूर्ण है। प्रभावी प्रवास की नितांत आवश्यकता रहती है। इसके पालन से कार्यकर्ता निर्माण और संगठन विस्तार में सफलता मिलती है।”इसके बाद प्रांत कोषाध्यक्ष रमेश भाई और माध्यमिक संवर्ग गुजरात के प्रदेश अध्यक्ष रमेश भाई चौधरी ने आर्थिक पक्ष के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान की।
बता दें, पूर्व पूर्णकालीन कार्यकर्ता के दायित्व की घोषणा प्रांत अध्यक्ष भीखा भाई पटेल द्वारा की गई। जिसके तहत अब सरदार सिंह मछार को पूर्णकालीन वानप्रस्थी के नाते गुजरात राज्य, रुचा बेन व्यास को दक्षिण संभाग, दशरथ भाई रावल को महेसाणा विभाग के महेसाणा, बनासकाठा एवं पाटण जिला, विद्या बेन कुलकर्णी को साबरकाठा जिला, श्री भीखा भाई पटेल को विजयनगर तहसील और हिम्मतनगर शहर इसके साथ ही श्री कन्हैया भाई को दांता, पोसीना एवं खेड़ ब्रह्मा तहसील का दायित्व दिया गया। श्री दिनेश भाई पटेल पाटण को राज्य के सभी जिलों के आर्थिक पक्ष एवं इससे संबंधित कार्य को देखने का दायित्व दिया गया है।
सत्र में पाथेय पूर्व जिज्ञासा समापन बाद श्री मोहनजी पुरोहित ने सभी पूर्णकालीन वानप्रस्थी कार्यकर्ताओ को कर्म क्षेत्र में जाने से पूर्व शुभकामना देते हुए कहा कि, पूर्णकालीन कार्यकर्ता तन से सैनिक और मन से सन्यासी बन कर्म क्षेत्र में पूर्ण मनोयोग से कार्य करें। यह संगठन की अपेक्षा रहती है। वानप्रस्थी पूर्णकालीन कार्यकर्ता में कर्तव्य बोध, गुरु बोध और आत्म बोध इन तीनों का त्रिवेणी संगम होना चाहिए। अंत में, कल्याण मंत्र के साथ अभ्यास वर्ग का समापन किया गया।